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Butterfly (1982) – एक खामोश, बेचैन कर देने वाली कहानी

  • Writer: Maluka
    Maluka
  • Jan 4
  • 1 min read

1982 की फ़िल्म “Butterfly” कोई आम सिनेमा नहीं है जिसे आप सिर्फ़ देखकर भूल जाएँ। ये एक ऐसी कहानी है जो धीरे-धीरे आपके ज़ेहन में उतरती है और अंदर कहीं सवाल छोड़ जाती है। 🦋

फ़िल्म अपने समय से काफी अलग थी — न ज़्यादा संवाद, न ज़रूरत से ज़्यादा शोर। यहाँ भावनाएँ, अकेलापन और इंसानी रिश्तों की उलझनें बड़े सधे हुए अंदाज़ में सामने आती हैं। Butterfly का हर फ्रेम किसी बंद कमरे की तरह लगता है, जहाँ किरदार अपने ही डर और चाहतों से जूझ रहे होते हैं।

इस फ़िल्म की सबसे बड़ी ताकत है इसकी असहज शांति। कुछ भी खुलकर नहीं कहा जाता, लेकिन बहुत कुछ महसूस कराया जाता है। जैसे तितली बाहर से खूबसूरत होती है, वैसे ही कहानी की परतों के नीचे छुपा दर्द धीरे-धीरे सामने आता है।

अगर आप तेज़ रफ्तार सिनेमा नहीं, बल्कि ऐसा कंटेंट पसंद करते हैं जो देखने के बाद भी आपके साथ चलता रहे, तो Butterfly (1982) ज़रूर देखनी चाहिए।ये फ़िल्म बताती है कि हर खूबसूरत चीज़ आज़ाद नहीं होती…और हर उड़ान के पीछे कोई न कोई कीमत ज़रूर होती है। 🎬🦋

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